यदुवंश को ऋषियों का श्राप
यदुवंश को ऋषियों का श्राप 🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼 शुकदेव जी ने कहा, परीक्षित! भगवान श्रीकृष्ण ने बलरामजी तथा अन्य यदुवंशियों के साथ मिलकर बहुत से दैत्यों का संहार किया। कौरवों ने कपट पूर्ण जूए(द्युत-क्रीड़ा)से युद्ध किया , तरह-तरह के अपमानों से तथा द्रौपदी के केश खींचने आदि अत्याचारों से पांडवों को अत्यंत क्रोधित कर दिया था। उन्हीं पांडवों को निमित्त बनाकर भगवान श्री कृष्ण ने दोनों पक्षों में एकत्र करते हुए बहुत सारे राजाओं को मरवा डाला कौरवों और पांडवों में भी मार-काट मचाने वाला अत्यंत प्रबल कलह उत्पन्न करके पृथ्वी का बहुत सारा भार उतार दिया। अपने बाहुबल द्वारा सुरक्षित यदुवंशियों के द्वारा पृथ्वी के भार-स्वरुप राजाओं और उनकी सेना का विनाश करके भगवान् श्रीकृष्ण ने विचार किया कि "पृथ्वी का बहुत सारा भार दूर हो जाने पर भी, वस्तुतः मेरी दृष्टि से वह अभी तक दूर नहीं हुआ है; क्योंकि अब तक अजेय यदुवंशी पृथ्वी पर अभी विद्यमान हैं। वे मेरे आश्रित हैं और अपने विशाल धन, बल और वैभव के कारण उच्छृंखल हो रहे हैं। अन्य किसी देवता आदि से भी इनकी पराजय नहीं हो सकती"। "बांस के वन म...